“का रहीम हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात”, इस दोहे का क्या अर्थ है?


I found this answer on Quora interesting:


इस दोहे में क्षमा के महत्व को बताया गया है। रहीम दास जी ने अपने दोहों में व्यवहारिक जीवन के मूल्यों, सिद्धान्तों एवं उपयोगी बातों का बहुत ही सरल तरीके से वर्णन किया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये दोहे आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। अगर आप उनके दोहों का अध्ययन कर लें तो आपको किसी नीति ग्रंथ को पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। अब आपके प्रश्न का उत्तर देते हैं। ये पूरा दोहा इस प्रकार है—

छिमा बड़न को चाहिए, छोटन को उतपात।

का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।।

रहीमदास जी कहते हैं कि छोटे चाहे जितना उत्पात करें। बड़ों को उन्हें क्षमा कर देना चाहिए। जैसे भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु को जब सीने में लात मारी थी, तो उन्होंने भृगु को क्षमा कर दिया था। इससे उनकी महत्ता घटी नहीं, बल्कि बढ़ ही गयी थी। रहीमदास जी के 101 बेहतरीन दोहे पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर आएं”

Another meaning / interpretation:

“छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात।
कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात ||

……
अगर छोटे बदमाशी करें कोई बड़ी बात नहीं और बड़ों को इस बात पर क्षमा कर देना चाहिए। बड़ों का फ़र्ज़ है छोटों को माफ कर देना । जिस प्रकार ऋषि भृगु ने श्री हरी (विष्णु) की छाती पर लात मारी थी इसमें श्री हरी का तो कुछ भी नहीं बिगाड़ा और ऋषि भृगु को अपनी गलती का अहसास होने पर श्री हरी ने उन्हें क्षमा कर दिया था | #rahimdas