यार जुलाहे / प्रिय विणकरा, – गुलजार/शांता शेळके | मराठी कविता संग्रह

यार जुलाहे / प्रिय विणकरा, – गुलजार/शांता शेळके

Creative Mind Space मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ फिर से बाँध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें आगे बुनने लगते हो तेरे इस ता…