शून्य मंदिर में बनूँगी —महादेवी वर्मा


शून्य मंदिर में बनूँगी महादेवी वर्मा शून्य मंदिर में बनूँगी आज मैं प्रतिमा तुम्हारी !अर्चना हों शूल भोले, क्षार दृग-जल अर्घ्य हो ले, आज करुणा-स्नात

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