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Mentoring Dreamers to Awaken their Dreams.

Give the spark that may get fanned and become High rise flames and Fire

Begin to light we must ignite the latent subconscious and fight for our Right.

I Wake up the dreamers and demand their need for rights
In the dead corner of their hippocampus lies a sleeping, latent WISH

In the dead of the night,

the mentor makes you set your sights  and

warns of the dangers of letting it remain dormant,

hibernating, not knowing, never knowing

What is inside your brain –

the latent  Potentials and Dreams
Mentor calls for your arms

to begin the Motion arising out of this E Motion.
There are goodbyes and there are no second glances
For in the middle,

We, we see the glimpse
Of the mass of wishes wanting to come alive and

take control of our FOCUS our FUTURE.
They CREATE our desire to  fight

the life’s battles ahead to make these dreams come true.

We’re living trees of our own anarchy
Mentees take hands
It’s our time to give this life its only chance
Not one step back
A Pure Heart will take a stand

Inner liberation thrills
Echoing through the hearts

the beginning of our new being

Take pride as this is the vision for us to live by or die, or die

We”re coming
Light the Spark we must ignite we fire to fight begin our night
We’re coming

 

Inspired by the Story by Chanakya.

चाणक्य नीति: जानिए किन लोगों की मदद न करें और रहें दूर
आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में 3 ऐसे लोगों के बारे में बताया है जिनकी मदद न करें और उनसे दूर रहें।

चाणक्य नीति में आचार्य कौटिल्य ने अपनी एक नीति में बताया है कि किन लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए वरना आप खुद परेशानी में पड़ सकते हैं। आचार्य चाणक्य ने बताया कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी मदद करने पर आप स्वयं मुश्किल में पड़ सकते हैं। समय, काल, परिस्थिति, धर्म और नीतियों को ध्यान में रखकर आचार्य चाणक्य ने कुछ लोगों को वर्ग विशेष में बांटा है। इसके अनुसार उन्होंने बुद्धि और चतुराई के उपयोग से कुछ ज्ञान की बाते बताई हैं। जानिए ये 3 लोग कौन हैं जिनकी मदद कभी नहीं करनी चाहिए

-चाणक्य ने अपने श्लोक में बताया है कि – मूर्खाशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दु:खिते सम्प्रयोगेण पंडितोऽप्यवसीदति।

1. मूर्ख व्यक्ति -आचार्य ने जिन लोगों से दूर रहने की बात कही है, उसमें पहला व्यक्ति है मूर्ख। यदि हम किसी मूर्ख व्यक्ति को जानते हैं तो उससे दूर ही रहना चाहिए। मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान देने की कोशिश भी न करें। हम मूर्ख को ज्ञान देकर उसकी भलाई करने की सोचते हैं, लेकिन मूर्ख व्यक्ति इस बात को नहीं समझेगा। ये लोग फिजूल तर्क-वितर्क करते हैं, जिससे हमारे समय का नुकसान होगा। इसीलिए ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।

2. बुरे चरित्र वाला व्यक्ति – यदि किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसका चरित्र ठीक नहीं है तो उससे दूर रहने में ही समझदारी है। ऐसी लोगों की भलाई करने पर या इनकी मदद करने पर भी हमारा ही नुकसान होना है। ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से समाज और घर-परिवार में श्रेष्ठ व्यक्ति को भी अपमानित होना पड़ता है। जो लोग धर्म से भटक जाते हैं, वे स्वयं तो पाप करते ही हैं और दूसरों को भी पाप के रास्ते पर ले जाते हैं। इसीलिए ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए।

3. हमेशा बिना वजह दुखी रहने वाला व्यक्ति – चाणक्य कहते हैं कि जो लोग अपने जीवन से संतुष्ट नहीं हैं और हमेशा ही दुखी रहते हैं, उनसे दूर रहना चाहिए। इन लोगों की भलाई करने पर भी हमें दुख ही मिलता है। ऐसे लोगों का जीवन चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो जाए ये हमेशा दुखी रहते हैं। ये लोग दूसरों के सुख से ईर्ष्या करते हैं और कोसते रहते हैं। इस प्रकार ईर्ष्या भाव रखने वाले और बिना वजह दुखी रहने वाले लोगों से भी दूर रहने में हमारी भलाई है।

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